Bihar Board 12th Biology Chapter 2 Subject Question 2026: पुष्पी पादपों मे लैंगिक जनन Subjective Questions, , यहां से याद करें, @biharboardcm.com
Bihar Board 12th Biology Chapter 2 Subject Question 2026:
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)
1. पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर को नामांकित चित्र द्वारा परिभाषित करें। (2022)
उत्तर : पुंकेसर – पुंकेलर पुष्प का नर भाग है। पह पुष्प का तीसरा चक्र है। इसमे दो भाग होते है- परागकोष व पुतन्तु, इसमे नर युग्मक परागकण का निर्माण होता है।
स्त्रीकेसर – यह पुष्य का मादा भाग है व चौथा चक्र होता है। इसके तीन भाग है वर्तिकात, कार्तिका व अण्डाशय, अण्डाशय में बीजान पाया जाता है जो मादा युग्मक का निर्माण करता है।
2. कदम्ब में किसके द्वारा परागण होता है? [2014]
उत्तर : कदम्ब में चमगादड़ के द्वारा परागण होता है इसे काइरोप्टेरोफिली कहते हैं।
3. विपुंसन से आप क्या समझते हैं? इसे क्यों कहते हैं? [2013]
उत्तर : अपरिपक्व पुष्प के पुंकेसर को काट कर हटाना विपुंसन कहलाता है, यह कृत्रिम परागण के लिए किया जाता है।
5. भ्रूणकोष की घटक कोशिकाओं के नाम क्या है? [2012]
उत्तर : प्रविन्यासत कोशिका – यह तीन कोशिका निभाग की तरफ होती है
ध्रुवीय केन्द्रक – केन्द्रीय कौशिका यह कोशिका मध्य में होती है इसमें २ केन्द्रक है।
अंड उपकरण – इसमें दो सहाय कोशिका और एक अण्ड कोशिका होती है। यह बीजाण्ड द्वार की तरफ होल है।
5. निम्नांकित को परिभाषित करें तथा प्रत्येक का एक उदाहरण दें। [2018]
(i) आभासी फल
(ii) वास्तविक फल
(iii) अनिषेचन जनित फल
(iv) बहुभ्रूणता
उत्तर : (i) अभासी फल- ऐसे फल जिनके निर्माण में पुष्प के अन्डाशय के अतिरिक्त अन्य भाग शामिल है | उदाहरण – सेब |
(ii) सत्य फल – ऐसे फल जिनके निर्माण में पुष्प के अण्डाशय ही शमिल हो उदाहरण : आम
(iii) अनिषेचन जनित फल – ऐसे फल जो बिना निषेचन के उत्पन्न हो | उदाहरण : केला, अंगूर |
(iv) बहुभ्रूणता : ऐसे बीज जिसमे एक से अधिक भ्रूण होते हैं | उदाहरण : आम, संतरा |
6. बीजाण्ड (ovule) को परिभाषित करें- [2017]
उत्तर : बीजाण्ड अंडाशय में पाई जाने वाली संरचना है, जो निषेचन के बाद बीज का निर्माण करती है । इसमे मादा युग्मको दभिद भ्रूणकोष पाया जाता है चिल्ने मादा युग्मक होता है।
7. कूट फल के बारे में सोदाहरण बताइए ।
उत्तर : ऐसे फल जिनके निर्माण में अण्डाशय के अतिरिक्त पुष के अन्य भाग भी शामिल हो। उदा० लेब के निर्माण पुष्यासन भाग लेता है।
8. मोनोकार्षिक फलों की सोदाहरण परिभाषा दें। [2013]
उत्तर : पादप जिनमे पूरे जीवनकाल में केवल एक बार पुष्प आते हो उन्हे मोनोकार्तिक पौधे कहते हैं। और झमे उत्पत्र फलों को मोरोकार्तिक फल कहते हैं।
दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न
1. पर-परागण को परिभाषित करें। पर-परागण के विभिन्न अभिकर्मकों को लिखें।
उत्तर : पर परागण जब एक पुष्प के परागकण किसी दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर जाएं तो इस परागण को पर परागण कहते हैं यह दो प्रकार को होता है- सजातपुष्पी परागण, पर निषेचन |
परपरागण हेतु किसी माध्यम की आवश्यकला बोती है विभिन प्रकार के अभिकर्मक निम्नलिखित है
कीट परागण – एसे पुष्प रंगीन, सुगंध युक्त, मकरंदयुक्त होते हैं। सर्वाधिक कीट परागण
मधुमक्खी द्वारा होता है इस प्रकार के परागण को एन्टिमोफिली कहते हैं।
पक्षी द्वारा परागण – पुष्प बड़े, रंगीन, मकरयुक्त व सुगन्धरहित होते हैं, ऐसे परागण को ऑर्निथोफिली कहते हैं।
चमगादड द्वारा – पुष्प रंगहीन, सुगंधमुक्त, मकरन्दयुक्त व प्रायः रात्रि में खिलते हैं इसे काइरिप्ड्रोफिली कहते हैं।
घोंघा द्वारा परागण – पुष्प प्रायः बरसात में खिलते हैं इसे मेलिकोफिली कहते हैं।
वायुद्वारा परागण – वायु द्वारा परागण वायु परागण कहलाता है इसे एनीमोंफिली भी कहते
जल द्वारा परागण – सबसे कम परागण होता है और केवल ३० प्राप्याति ही परागण जल द्वारा होता है इसे हाइड्रोफिली कहते हैं।
2. पुष्षीय पौधों में निषेचन की क्रिया का वर्णन करें। दोहरा निषेचन
उत्तर : पुष्पी पादप में निषेचन को दोहरा निषेचन कहते हैं यह प्रक्रिया परागण के बाद होती है इस प्रक्रिया में निम्नलिखित घटनाएं होती है:
* सर्वप्रथम परागकण वर्तिकाग्र पर पहुंच कर इसकी जनन कोशिका में समसूत्री विभाजन द्वारा दो जनन कोशिका का निर्माण होता है।
* परागकण से एक परागनलिका का निर्माण होता है जो बीजाण्ड में प्रायः बीजाण्डद्वार द्वारा प्रवेश करती है,इसे दिशा निर्देशिन का कार्य तन्तुरूप समुच्चय द्वारा होता है।
* दोनो जनन कोशिका परागनली द्वारा बीजाण्ड में प्रवेश करती है।
* प्रथम जनन कोशिका अंड कोशिका से निषेचन करके युग्मनज का निर्माण करती है, यह प्रथम निषेचन है। इत्ते संयुग्मन भी कहते हैं।
* द्वितीय जनन कोशिका ध्रुवीय केन्द्रक से निषेचन करके भ्रूणपोष का निर्माण करती है, इसे त्रिसंलयन कहते हैं
3. परागण के विभिन्न अभिकर्मकों (Agents) का वर्णन करें।
परागण के लिए पौधे जैविक और अजैविक दोनों साधनों का उपयोग करते हैं:
अजैविक: वायु (Anemophily) और जल (Hydrophily) द्वारा।
जैविक: कीट (Entomophily), पक्षी और चमगादड़ द्वारा। कीट परागित पुष्प प्रायः रंगीन और सुगंधित होते हैं।
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
| शब्द | परिभाषा |
| अनिषेकजनन (Parthenogenesis) | बिना निषेचन के फल बनने की प्रक्रिया। |
| बहुभ्रूणता (Polyembryony) | एक बीज में एक से अधिक भ्रूणों का होना (जैसे- नींबू)। |
| टेपिटम (Tapetum) | परागकोश की सबसे आंतरिक परत जो परागकणों को पोषण देती है। |